हाल ही में बहुत ही दुखद अहमदाबाद विमान दुर्घटना में एक को छोड़कर विमान में बैठे लगभग सभी यात्रियों का अवसान हुआ और जिस इमारत पर विमान गिरा उस में भी कुछ लोगों के अवसान की ख़बर आई थी। जिन परिवारों ने अपने घर के चिरागों को खोया है उन पर क्या बीत रही होगी हम समझ सकते है।
हम कोई विमान,एयरपोर्ट, ओर इन घटनाओं के विशेषज्ञ तो नहीं है पर क्या 274 के करीब लोगों के जान कोई कीमत नहीं है। अगर है तो हमें हर कोण से विचार करना पड़ेगा कि ये घटना क्यों घटी ।
ज्यादातर विमान या तो उड़ान भरते समय या लैंडिंग करते समय दुर्घटना ग्रस्त होते हैं। तो क्या अगर ये एयरपोर्ट शहर के बार खुली जगह में होता तो भी इतनी जाने जा सकती थी । क्या एयरपोर्ट के आस पास जगह को खुला नहीं रखना चाहिए।
जैसे कि हमने पहले कहा कि हम कोई विशेषज्ञ तो नहीं है पर अगर हम अपनी सामान्य बुद्धि लगाए तो दोनों ठोस वस्तुएं आपस में अगर टकराती है तब दोनों ठोस वस्तुओं को नुकसान होता है। जैसे विमान जिस ठोस इमारत से टकराया उसमें उस इमारत ओर विमान दोनों को भयंकर नुकसान हुआ। तो क्या अगर एयरपोर्ट के आस पास खुली जगह होती तो ओर विमान उस खुली जगह में लैंडिंग करता तो भी इतना बड़ा नुकसान होता । शायद नहीं क्योंकि सबसे पहले तो उस इमारत में जिन लोगों की जान गई है वो बच जाते ।
अगर विमान खुली जगह में उतरता तो सैफ लैंडिंग की संभावना बढ़ जाती । जमीन इतनी कठोर नहीं होती है जिसके कारण विमान में इतना बड़ा विस्फोट नहीं होता। तो क्या ये नियम नहीं की एयरपोर्ट के आस पास 2 तीन किलोमीटर तक जगह खाली होनी चाहिए। और अगर ऐसा नियम हो तो उस नियम का पालन क्यों नहीं किया गया।
बाहर के कई देशों में एयरपोर्ट शहर से बाहर होते है पर क्या ये सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है कि वो अपनी जनता की सुरक्षा सर्वोपरि रखे। अब बात करते है जनता की तो अगर हम बात करे विकसित देशों की तो जो आर्थिक स्थिति से मजबूत देस है उनके देशों लोगों की संख्या बहुत कम है वहा उनके पास खुली जगह बहुत है बात करे भारत की तो जो इतनी पॉपुलेशन है उसके जवाबदार हम ही है।
