Home धर्म योग का वास्तविक अर्थ: गीता की दृष्टि से

योग का वास्तविक अर्थ: गीता की दृष्टि से

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भारत ने आज 21 जून को योग दिवस के रूप में धूम धाम से मनाया गया। पर क्या हम जानते है कि योग का वास्तविक अर्थ क्या होता है श्रीमद भगवद गीता में श्री कृष्ण ने योग को बड़ी बारीकी से समझाया है । पर आज हमने जो योग को अर्थ दिया है वो श्री कृष्ण की गीता से बिल्कुल अलग है । 

श्री कृष्ण गीता में समझाया है कि अहंकार का जब आत्मा में विलीन हो जाना ही वास्तविक योग है । पर आज हम उस अंहकार पर ध्यान नहीं देकर शरीर से कुछ गतिविधियां करवाके उसे योग कहते है । 

शरीर को स्वस्थ और सुगठित रखना सही ये पर इस क्रिया करने वाले ओर क्रियाओं को योग नहीं कह सकते है। आज दुनिया विनाश के कगार पर खड़ी है । क्यों कि हमारे भीतर जो अहंकार है वो सिर्फ अंधे भोग में डूबा हुआ है और वो इतना बेहोश है कि इसने उसके रहने के लिए गृह है उसको भी विनाश के कगार पर खड़ा कर दिया है । 

अगर आज हमें दुनिया को बचाने है तो एक मात्र रास्ता है वो है अहंकार को प्रकृति से आत्मा की तरफ मोड़ना होगा और अहंकार का आत्मा से मिलन है वास्तविक योग है जो हमारे सनातन धर्म की सबसे उसी सिख है

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