सुंधा माता का मंदिर जालोर जिले के भीनमाल से 15 किलोमीटर की दूरी पर है। सुंधा माता मंदिर प्रवेश से पहले एक बड़ी ढलान है रोड से उस ढलान के रास्ते से सुंधा माता मंदिर के गेट तक पहुंचा जाता है।
मन्दिर के दोनों तरफ प्राकृतिक सुंदरता का खूबसूरत नजारा है । दो पहाड़ों के बीच से मंदिर तक पहुंचा जाता है । मन्दिर तक जाने के लिए रोपवे ओर सीढ़ियों की सुविधा है।
सुंधा माता मंदिर, राजस्थान के जालौर जिले में स्थित एक प्राचीन शक्तिपीठ है, जो मां चामुंडा को समर्पित है। यह मंदिर सुंधा पर्वत की ऊँचाई पर स्थित है, मंदिर का ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व इसे राजस्थान का एक प्रमुख तीर्थस्थल बनाता है।

मंदिर का इतिहास
सुंधा माता मंदिर की स्थापना लगभग 900 वर्ष पहले हुई थी।
यहाँ मिले शिलालेख बताते हैं कि यह मंदिर प्रतिहार राजाओं के काल का है।
राठौड़ वंश के शासकों ने इस मंदिर को विशेष रूप से संरक्षित किया।
देवी चामुंडा:
मां चामुंडा को बुरी शक्तियों के नाश की देवी माना जाता है।
माना जाता है कि महिषासुर वध के बाद देवी इसी पर्वत पर आई थीं।
प्राकृतिक सौंदर्य और पर्वत
मंदिर सुंधा पर्वत की चोटी पर स्थित है (लगभग 1220 मीटर ऊंचाई पर)।
वर्षा ऋतु में यहां झरनों और हरियाली का दृश्य भक्तों को आकर्षित करता है।
रोपवे सुविधा:
सुंधा माता मंदिर में दर्शन के लिए आधुनिक रोपवे सिस्टम है।
यह सुविधा विशेष रूप से बुजुर्गों और बच्चों के लिए लाभकारी है।
धार्मिक आयोजन:
नवरात्रि में विशेष पूजा, भजन संध्या और मेले का आयोजन होता है।
श्रद्धालु दूर-दूर से माता के दर्शन को आते हैं।
निष्कर्ष:
सुंधा माता मंदिर एक अद्भुत स्थान है जहाँ भक्ति, इतिहास और प्रकृति एक साथ मिलते हैं। राजस्थान आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर अवश्य देखने योग्य है।