भारत में हर साल आषाढ़ महीने के पूर्णिमा का दिन हमारे महान गुरुओं को समर्पित है भारत इस दिन को को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाता है। भारत ने गुरुओं को भगवान से भी ऊंचा स्थान दिया गया है । इस साल गुरु पूर्णिमा 10 तारीख को रात 12 बजे से शुरू होती है और दूसरे दिन 11 तारीख को रात 12 समाप्त होती है।
भारत में गुरुओं का सम्मान
भारत में दूसरे देशों को मुकाबले गुरुओं को अधिक सम्मान मिला है। कई जगह पर वर्णन है कि भारत ने गुरुओं को भगवान से भी ऊंचा स्थान दिया गया है । सन्त कबीर साहब ने तो अपने दोहों में कई बार गुरुओं का गुणगान किया है।
गुरु को समर्पित कबीर साहब के दोहे
कबीर साहब ओर कई महापुरुषों ने गुरु के महत्व को अपने दोहे या अन्य माध्यम से आम जन तक पहुंचाया हैं। नीचे कबीर के गुरुओं को समर्पित दोहे।
गुरु गोविन्द दोनों खड़े काके लागू पाव
बलिहारी गुर आपने गोविंदियो मिलाए
सात समंद की मसि करौं, लेखनि सब बनराइ। धरती सब कागद करौं, तऊ गुरु गुण लिख्या न जाइ।
गुरु पुर्णिमा के दिन क्या करे
गुरु का स्थान हमारे जीवन किसी एक दिन नहीं प्रतिदिन होना चाहिए। पर सबसे पहले हमें गुरु के सामने सिर झुकाने से पहले पता करना होगा कि हम जिसे गुरु कहते है वो वास्तव में गुरु कहलाने के लायक है या नहीं। क्यों कि झूठे गुरुओं के सामने सिर झुकाना गुरुओं का अपमान है।
गुरुओं का हमारे जीवन में महत्व
वास्तव में गुरु को हमसे कुछ नहीं चाहिए होता है वो करुणावश हमारे दुख को दूर करने के लिए हमारे बीच आते हैं। गुरु हमारे जीवन को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते है । वास्तव में आज जो दुनिया में कही मानवता कायम है तो उन मुठ्ठी भर महान लोगों की वजह से है।
गुरु पुर्णिमा के दिन क्या करे
वास्तव में अगर गुरुओं को सम्मान देना चाहते है तो हमें गुरुओं के करीब जाना होगा और उनकी शिक्षाओं को समझना होगा । गुरु पुर्णिमा के दी आप को वास्तविक गुरु की संगति करनी होगी। संगति या प्रत्यक्ष रूप से या किताबों के रूप में उन्होंने जो महान साहित्य छोड़ा उनकी शिक्षाओं को समझना होगा।
कैसे करे शुरुआत
गुरु पूर्णिमा के दिन आप भारत के जो महान संत हुए है जैसे आदि शंकराचार्य कबीर साहब गुरु नानक रमण महर्षि कृष्ण मूर्ति गौतम बुद्ध उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारना चाहिए।
आज अगर प्रत्यक्ष रूप से गुरु के सामने जाना चाहते है तो आज के समय में भारत के सबसे बड़े धर्म प्रचारक आचार्य प्रशांत । उनसे ऑनलाइन जुड़कर उनकी शिक्षाओं में हमारे सभी ग्रन्थ और गुरुओं की सीख के करीब जा सकते है।
